न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, डुबोया मुझको होने ने न मैं होता तो क्या होता !
हुआ जब गम से यूँ बेहिश तो गम क्या सर के कटने का, ना होता गर जुदा तन से तो जहानु पर धरा होता! हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है, वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !
सफ़र में मुश्किलें आये तो हिम्मत और बढती है... कोई जब रास्ता रोके तो जुर्रत और बढती है... अगर बिकने पर आ जाओ तो घट जाते है दाम अक्सर... न बिकने का इरादा हो तो कीमत और बढती है...