Monday, November 2, 2015

हिन्दी शायरी

वो जान गयी थी हमें दर्द में मुस्कराने की आदत हैं,
वो रोज नया जख्म देती थी मेरी ख़ुशी के लिए

For more
हिन्दी शायरी

0 comments:

Post a Comment